Shighrapatan Ko Kaise Roke

Shighrapatan Ko Kaise Roke

शीघ्रपतन को कैसे रोकें?

जरूरी जानने योग्य बातें :

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1. शीघ्रपतन अपने आप में कोई रोग नहीं है, बल्कि स्वयं अर्जित रोग लक्षण, जिसका मुख्य कारण असंयमित संभोग, अप्राकृतिक मैथुन एवं अस्वभाविक इन्द्रिय परिचालन तथा अश्लील वातावरण, अश्लील साहित्यों का अध्ययन, अश्लील तस्वीरों को देखना आदि।

2. कुछ ऐसे भी रोगी होते हैं जो उपरोक्त कारणों से मुक्त होते हैं, लेकिन अपने आपको शीघ्रपतन का रोगी भ्रमवश या अज्ञानतावश मानते हैं।

3. कुछ के मित्रगण, उनके सामने अपनी संभोग की चर्चा करते हुए बतलाते हैं कि मैं तो आधा घंटा के बाद स्खलित होता हूं, तो कुछ मित्र ऐसे भी मिलते हैं, जो अपनी स्खलन की अवधि एक घंटा तक भी बतला देते हैं। वस्तुतः ऐसे मित्र स्वयं झूठ बोलकर आपको बेवकूफ बनाते हैं। ये इसलिए मनमानी ढंग से गप्पे मारते हैं, क्योंकि इनके कोई भी अन्य मित्र जहां और जब ये संभोगरत होते हैं।

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4. आपको यह सुनकर आश्चर्य होगा कि ऐसे गप्पे मारने वालों में से कुछ स्वयं भी शीघ्रपतन के शिकार होते हैं और कहीं मेरा भेद खुल न जाये इसलिए भी अपने संबंध में स्वयं मित्रों के सामने ऐसी बातें करते हैं।

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5. कुछ ऐसे भी होते हैं, जो ऐसा कुछ नहीं करते हैं। फिर भी 10-15 या 20 मिनट तक संभोगरत रहने के बाद स्खलित होने की बात कहते हैं। ये मित्र सफल संभोग की अवधि में, संभोग के आनंद में इस प्रकार डूब जाते हैं कि उन्हें समय का सच्चा ज्ञान नहीं रहता है।

6. यदि ‘स्टाॅप वाॅच’ का प्रयोग करके संभोग की अवधि को मापा जाये, तो ढाई मिनट तक ही 80 प्रतिशत पुरूष संभोग में समय ले पाते हैं। इतने समय में ही अपनी पत्नी(नायिका) को संतुष्ट भी कर पाते हैं।

7. यदि नायक-नायिका दोनों ही ‘काम-सूत्र’ के ज्ञाता हों, कामक्रीड़ा में एक-दूसरे को सहयोग करें, तो 1 मिनट के संभोग(घर्षण) से भी दोनों पक्ष संतुष्ट हो जाते हैं। ऐसे संभोग को भी ‘सफल संभोग’ कहा जाता है।

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8. कभी-कभी ऐसा भी होता है कि स्खलन में देर होती है। ऐसा तब होता है जब बार-बार संभोग के कारण वीर्य का अभाव हो जाता है और लिंग में भी शिथिलता आ चुकी होती है तथा तन और मन थक चुके होते हैं। फिर भी नायक गिनती पूरा करने में लगा रहता है। घर्षण जारी रखता है, लेकिन अभाव के कारण वीर्यपात नहीं होता है। यदि नासमझ नायक ऐसे मैथुन को भी संभोग या सफल संभोग मान लेता है तो यह उसकी भूल है। यह संभोग दुष्परिणाम की ओर ले जाता है। शिथिल लिंग से घर्षण करने से नायिका(पत्नी) की दृष्टि में नीचे गिरा देता है। घंटा तो नहीं, कुछ मिनटों तक घर्षण के बाद यदि पतले वीर्य की 2-4 बूंदें निकल ही जायें तो उसे स्खलन नहीं कहा जा सकता है। बल्कि वीर्य भंडार खाली होने का संकेत है। यह पुरूष को शीघ्रपतन एवं अन्य कई गुप्त रोगों का शिकार बना देता है।

जैसा कि ऊपर के उदाहरणों में स्पष्ट किया जा चुका है कि अपने मित्रों के मुंह से झूठी बातों में आकर भ्रमवश कई युवक अपने आपको ‘शीघ्रपतन’ का शिकार मान लेते हैं, उसी प्रकार कभी ‘हस्तमैथुन’ करने से या कभी ‘स्वप्नदोष’ हो जाने के बाद भी अपने आपको नपुंसक, वीर्यहीन एवं शीघ्रपतन का रोगी मत समझें।

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केवल पुरूषों के लिए हिंदी में ब्लाॅग, जानिए शीघ्रपतन क्यों होता है? Shighrapatan Ko Kaise Roke
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Chetan Anmol Sukh
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