Shighrapatan Ki Samasya Se Paye Chutkara

Shighrapatan Ki Samasya Se Paye Chutkara

क्या शीघ्रपतन की समस्या से आप भी हैं परेशान?

यहां बता दें कि शीघ्रपतन कोई रोग या बीमारी नहीं है। यह तो केवल एक दिमागी उपज या मानसिक सोच होती है और दिमागी उपज और मानसिक सोच पर काबू पाया जा सकता है। अगर हम दिमागी तौर पर स्ट्राॅन्ग हों और धैर्य से संभोग करें, तो शीघ्रपतन से बच सकते हैं।

स्त्री या अपनी पत्नी के साथ संभोग करते समय पुरूष यदि स्त्री के पहले ही स्खलित हो जाये और स्त्री पूरी तरह संतुष्ट न हुई हो तो यह समस्या शीघ्रपतन कहलाती है। पुरूष जितनी देर तक संभोग करते हुए खुद को स्खलित होने से रोक पाता है, यह शक्ति ही स्तम्भन शक्ति कहलाती है। पुरूषों में यह स्तम्भन शक्ति भिन्न-भिन्न हो सकती है। कोई पुरूष अधिक स्तम्भन शक्ति वाला होता है, तो कोई बिल्कुल कम। यह उसकी मानसिक क्षमता पर निर्भर करता है।

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कई पुरूष तो ऐसे भी होते हैं, कि शारीरिक मिलन के प्रथम चरण यानी चुम्बन, आलिंगन, स्पर्श व मर्दन के दौरान ही तुरन्त स्खलित हो जाते हैं और हांफने लगते हैं। इससे पत्नी व स्त्री जिसके साथ मिलन किया जा रहा था, वह रूष्ट हो जाती है और दोनों के मध्य रिश्तों में कड़वाहट आने लगती है। आश्चर्य की बात तो यह है कि कई पुरूष तो केवल कामुक बातों व सुंदर स्त्रियों के नग्न चित्र व वीडियो देखकर ही स्खलित हो जाते हैं। ये सभी लक्षण शीघ्रपतन की समस्या होने के सूचक हैं। इन सब बातों व लक्षणों से आप स्वयं अपनी स्थिति का निरीक्षण कर सकते हैं, क्योंकि अगर आपके साथ भी यही सब घटित हो रहा है, तो आप शीघ्रपतन से पीड़ित हैं अन्यथा नहीं। अगर आप खुद को शीघ्रपतन का शिकार पाते हैं, तो आपको जरूरत है अपनी स्तम्भन शक्ति को बढ़ाने की और मानसिक रूप से दृढ़ व संयमित होने की।

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क्यों होती है शीघ्रपतन की समस्या?

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  • शीघ्रपतन के मुख्य कारक होते हैं व्यक्ति के बुरे, कामुक विचार और आदत। अगर कोई पुरूष बहुत ज्यादा उत्तेजक स्वभाव का हो, हर समय सुंुदर स्त्रियों के ख्यालों में ही खोया रहता हो, उनके निर्वस्त्र बदन व अंगों की कल्पना करता रहता हो, तो ऐसी मनोदशा रखने वाला व्यक्ति इतना ज्यादा कामसुख पाने के लिए लालायित हो जाता है कि वह अपनी ‘कामक्षुधा’ को शांत करने के लिए हस्तमैथुन का सहारा लेने लगता है(कोई स्त्री, पत्नी व अन्य साधन उपलब्ध न होने की स्थिति में)। और फिर यही हस्तमैथुन की आदत आगे चलकर शीघ्रपतन का कारण भी बन जाती है।
  • इसके अतिरिक्त आहार में पोषक तत्वों का अभाव, बहुत अधिक तेज मिर्च-मसालों का प्रयोग, नशा, शराब, खटाई, फास्ट फूड आदि सेवन करने से वीर्य में विकार उत्पन्न होते हैं और इसी के कारण शीघ्रपतन की समस्या भी उत्पन्न होने लगती है।
  • दिमागी तौर पर अशांत रहने से, गहरा दुःख, किसी प्रकार का डर इत्यादि कारणों से भी शीघ्रपतन हो सकता है।
  • इसके अतिरिक्त संभोग में पूर्ण रूप से अपनी महिला साथी का सहयोग ना मिल पाने के कारण भी ऐसा होता है। दरअसल स्त्री द्वारा तन-मन से पूरी तरह सहयोग न मिलने से या स्त्री द्वारा आनाकानी करने से पुरूष झल्ला जाता है और इस तरह स्त्री की अरूचि देखते हुए पुरूष बौखला कर शीघ्र ही स्खलित हो जाता है।

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शीघ्रपतन रोकने के सरल उपाय-

  1. आधा कटोरी उड़द की धुली हुई दाल लें और आधा कटोरी ही पुराने चावल लेकर खिचड़ी बनायें। शीघ्रपतन से पीड़ित व्यक्ति को यह खिचड़ी देसी के घी साथ खूब अच्छे चबा-चबाकर खाने का निर्देश दें। लगभग एक माह तक इसका सेवन करायें। खिचड़ी खाने के उपरान्त एक गिलास मीठा हल्का गरम दूध पीने को कहें। शीघ्रपतन में बहुत उपयोगी उपाय है।
    नोट: पीड़ित को यह खिचड़ी उसकी पाचन शक्ति के अनुसार ही खाने को दें और धीरे-धीरे इसकी मात्रा बढ़ाएं। अन्न को अच्छे से चबाना जाना अति आवश्यक है, ताकि भोजन सही से पच सके। पचेगी तभी असर दिखेगा। बेहद फायदेमंद और सरल है।
  2. कौंच के शुध्द बीज(पंसारी पर उपलब्ध मिलेंगे) इसकी 100 ग्राम मात्रा को एकदम महीन कर लें यानी चूर्ण बना लें। इस तैयार चूर्ण को 250 ग्राम मैदा में मिश्रित करके पानी से गूंथ लें। अब इनके गोलनुमा आकार बना लें, जामुन के समान। उसके बाद इसे देसी घी में तल लें। अब शक्कर की चाशनी तैयार करके इन्हें उसमें डुबोकर निकाल लें। किसी साफ बर्तन में रखें। सभी गोलेू अच्छे से शहद में अंदर तक डूब जायें, शहद की इतनी मात्रा डालें।
    विधि: इन तैयार गोलों मंे से सुबह-शाम एक-एक गोला खाली पेट खाना है, वो भी अच्छे से चबा कर। साथ में ऊपर से एक गिलास गुनगुना मीठा दूध पी लें। ध्यान रहे इसके सेवन के बाद लगभग घंटे तक कुछ भी न खायें। इसे इतना बनायें कि जरूरत के अनुसार 6 -7 दिन तक पीड़ित नियमित सेवन कर सके। समाप्त हो जाये तो दोबारा बना लें। आपको एक माह तक इसे खाना है। यह बेहद लाभदायक और असरकारी उपाय है।

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  1. अन्य देसी उपाय में आप ऐसा करें कि अश्वगंधा, गोखरू और शतावर की 100-100 ग्राम मात्रा लेकर एकदम बारीक पीसकर चूर्ण तैयार लें। इस चूर्ण की एक चम्मच मात्रा लेकर शहद के साथ सेवन करें। उसके बाद एक गिलास ठण्डा मीठा दूध पी लें। ऐसा सुबह खाली पेट करना है। फिर रात्रि में भोजन करने के लगभ दो घंटे के अंतराल में सेवन करना है। तेल, खटाई की मात्रा कम ही लें या ना ही लें।
  2. बिना बीज वाली बबूल की कच्ची फली, बबूल की पत्तियां, बबूल का गोंद तीनों को समान मात्रा में लेकर छाया में सुखा लें। तीनांे को बारीक पीसकर चूर्ण बना लें। ये चूर्ण एक चम्मच और एक चम्म्च पिसी मिश्री मिलाकर फांक लें ऊपर से गुनगुना मीठा दूध पी लें। इस चूर्ण का दो माह तक रोजाना सुबह सेवन करने से शीघ्रपतन में बहुत ज्यादा आराम जाता है।
  3. लगभग एक सप्ताह तक यदि शीतलचीनी(कबाबचीनी) का महीन चूर्ण जल के साथ लिया जाये तो शीघ्रपतन अतिशीघ्र लाभ होता है।
  4. संभोग के समय जब लगने लगे कि वीर्यपात होने वाला है, तब लंबी और गहरी-गहरी सांसें लें। इससे कामोत्तेजना में थोड़ी शीतलता आ जायेगी और इससे टाईमिंग भी बढ़ेगी।

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केवल पुरूषों के लिए हिंदी में ब्लाॅग, जानिए शीघ्रपतन क्यों होता है? Shighrapatan Ki Samasya Se Paye Chutkara
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Chetan Anmol Sukh
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