Shighrapatan Ki Medicine

Shighrapatan Ki Medicine

शीघ्रपतन की मेडिसिन

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शीघ्रपतन क्या होता है?

जैसा कि नाम से ही प्रतीत होता है शीघ्र यानी जल्दी और पतन यानी नष्ट होना, खराब होना व दमन होना। अब क्योंकि यह संभोग से संबंधित या यूं कह लें कि सेक्स समस्या से संबंधित समस्या के लिए संबोधित किया जाने वाला शब्द है, इसलिए संभोग के संदर्भ में शीघ्रपतन उसे कहते हैं जब कोई पुरूष अपनी महिला पार्टनर को सेक्स में पूर्ण संतुष्ट किये बिना कुछ ही क्षणों में स्वयं स्खलित हो जाये।
कई पुरूष तो फोरप्ले के दौरान ही स्त्री द्वारा छूने या फिर स्वयं स्त्री को छूते ही स्खलित हो जाते हैं। या फिर योनि में लिंग प्रवेश कराते ही तुरन्त वीर्यपात हो जाता है। इस अवस्था में पुरूष को स्त्री के सामने शर्मिन्दा होना पड़ता है। पत्नी या महिला पार्टनर भी अपने पुरूष साथी से धीरे-धीरे घृणा करने लगती है। पूर्ण रूप से शारीरिक संतुष्टि नहीं मिल पाने के कारण वह स्वभाव से चिड़चिड़ी हो जाती है।

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शीघ्रपतन के कारण-

शीघ्र वीर्यपात होने की वजह अनेक हो सकती है, जिनमें कुछ प्रमुख हैं- लगातार अप्राकृतिक तरीके से वीर्य को नष्ट करते रहने से जैसे हस्तमैथुन, अत्यधिक स्त्री-संसर्ग करना, स्वप्नदोष अधिक होना, जननेन्द्रिय संबंधी स्थानीय रोग, सुजाक, शराब व धूम्रपान करना, कभी-कभी अवैध संबंधों में किया जाना वाला सेक्स भी शीघ्रपतन का कारण बन जाता है। पीड़ित व्यक्ति को इनसे जरूर खुद को बचाकर रखना चाहिए। इसके बाद ही कोई उपचार संभव है।

शीघ्रपतन के लक्षण-

संभोग की अवधि कम हो जाना, रोग पुराना होने पर संभोग क्रिया से पूर्व ही वीर्य निकल जाना और रोग अधिक पुराना होने पर केवल आलिंगन करने से वीर्य निकल जाता है। इस स्थिति तक पहुंच कर यदि चिकित्सा उपलब्ध नहीं हो तो मात्र संभोग या कामुक दृश्य अथवा रूपवती स्त्री या लड़की का मात्र ध्यान करने से वीर्य स्खलित हो जाता है। यह स्थिति रोग की जटिलता को प्रदर्शित करती है। चिकित्सा परमावश्यक है। यदि ऐसा नहीं हो पाता है तो रोगी नपुंसक हो जाता है।

शीघ्रपतन के रोगी को निम्न बातों पर ध्यान देना चाहिए-

1.अपनी दिनचर्या को नियमित बनायें।

2. सूर्योदय से कम से कम एक घंटा पहले उठकर शौचादि से निवृत्त होकर कम से कम आधा घंटा खुली हवा में टहलना चाहिए।

3. कब्ज़ नहीं होने दे। इसके प्रति सजग रहें।

4. नित्य सुबह तथा रात को ताम्बे के बर्तन में जल डाल दें। प्रातः जल का पान करें।

5. खानपान में उत्तेजक पदार्थों को मत लें।

6. अश्लील चित्र देखना, अश्लील दृश्यों का ध्यान करना, अश्लील उपन्यास आदि न पढ़ें। अपने धर्म के अनुसार धार्मिक पुस्तकें पढ़ें। एकांत में मत रहें। शारीरिक क्षमता के अनुसार अपने आपको कार्य में व्यस्त रखें।

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7. पौष्टिक और विटामिन युक्त आहार खायें।

8. संभोग से पहले पत्नी को भी संभोग के लिए केवल मानसिक रूप से नहीं, शारीरिक रूप से भी तैयार करें। इसके लिए अन्य कामक्रीड़ा आदि के अतिरिक्त भगाँकुर को भी अंगुलियों से सहलायें। जब भगाँकुर में लिंग की भाँति कड़ापन आ जाये, तब उसे अपने लिंग से सहलाये और बीच-बीच में लिंग को अंदर-बाहर भी करें। जब स्खलित होने की संभावना हो तो लिंग को तुरन्त कुछ क्षणों के लिए बाहर निकाल लें एवं अपने ध्यान को संभोग से हटाकर कहीं और ले जायें। कुछ ही क्षण बाद पुनः संभोगरत हो जायें, लेकिन जल्दी न करें। इस विधि से दोनों पक्ष संतुष्ट हो जाते हैं।

शीघ्रपतन के रोगी के लिए पथ्य-

गेहूँ, जौ, उड़द, अरहर, छिले आलू, गोभी, शकरकन्दी, पेठा, भिण्डी, केला, लौकी, जिमीकंद चैलाई, दूध, दही, घी, मावा, मिश्री, सेब, अनार, पालक, मोदक, घी, गुड़, गुलाब-जामुन, घेवर, मालपूड़ा, पूड़ी आदि पौष्टिक पदार्थ खायें।

शीघ्रपतन के रोगी के लिए अपथ्य-

अधिक खटाई, तेल, लालमिर्च, व्रतोपवास, अधिक श्रम, मैथुन, चिंता, दिन में सोना, व्याभिचार, शोक-भय, अधिक चलना, तेज सर्दी या गर्मी में रहना, बासी भोजन खाना, बड़ी आयु वाली स्त्रियों से समागम करना, हस्तमैथुन या गुदामैथुन आदि अपथ्य हैं।

शीघ्रपतन दूर करने के लिए आयुर्वेदिक उपचार-

Shighrapatan Ki Medicine

1.नील कमल और श्वेत कमल की केसर, शहद और खार को पीसकर नाभि पर लेप करके मैथुन करने से लिंग में कड़ापन आ जाता है और स्तम्भन देर तक होती है।

2. सिद्ध किये हुए कुसुम के तेल में भूमितला या शंखपुष्पी(अपराजिता) का चूर्ण मिलाकर पैरों पर लेप करने और संभोग करने से वीर्य स्खलित जल्दी नहीं होता और लिंग कड़ा बना रहता है।

3. अकरकरा, असगन्ध, जायफल, चिनिया कपूर, जावित्री, खुरासानी बच, धुली हुई भांग और रस सिन्दूर-प्रत्येक 7-7 ग्राम लेकर, कूट-पीस छानकर तैयार कर लें। इसमें 5-6 ग्राम मिश्री मिलाकर थोड़े जल के योग से 4-4 ग्राम की गोलियां तैयार कर छाया में सुखा लें। ऊपर से चांदी का वर्क लपेट दें। नित्य शाम को 4 ग्राम की 1 गोली या चूर्ण सेवन करके ऊपर से मूली खाने से वीर्य तब तक स्खलित नहीं होता, जब तक कि नींबू का रस नहीं चूसा जाये।

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4. हीरा हींग को शहद में पीसकर लिंग पर लेप करने से अधिक देर तक स्तम्भन होता है।

5. करन्ज की पत्तियों का स्वरस निकाल कर हथेली एवं पैर की तलवों पर अच्छी तरह मलें। डेढ़ से दो घंटे के बाद संभोग करें तो वीर्य काफी देर से स्खलित होगा।

6. कौंच की जड़ लगभग 1 इंच मुंह में रखकर स्त्री से सेक्स करें तो मुंह में जड़ को निकाले बिना वीर्य स्खलन नहीं होगा।

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केवल पुरूषों के लिए हिंदी में ब्लाॅग, जानिए शीघ्रपतन क्यों होता है? Shighrapatan Ki Medicine
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Chetan Anmol Sukh
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