Shighrapatan Ka Ilaj

Shighrapatan Ka Ilaj

शीघ्रपतन का इलाज

Premature Ejaculation, Shighrapatan Ki Medicine, Shighrapatan Ki Dawa

शीघ्रपतन में पुरूष अपनी महिला साथी के साथ या पत्नी के साथ संभोग के दौरान बिना अपनी पार्टनर को संतुष्टि दिये स्खलित हो जाता है। यानी जब कोई पुरूष, स्त्री के साथ संभोग करे और लिंग प्रवेश कराते ही या फिर प्रवेश से पूर्व ही तत्काल वीर्य स्खलित हो जाये तो यह समस्या शीघ्रपतन कहलाती है। शीघ्रपतन के कारण सहवास में स्त्री को न तो पूर्ण आनंद प्राप्त आ पाता है और न ही वह तृप्ति प्राप्त कर पाती है, जिस कारण वह पति से नफरत करने लगती है। पति या पुरूष भी स्त्री के सम्पर्क में जाने कतराने लगता है और शर्मिन्दगी का एहसास करने लगता है।

शीघ्रपतन कभी-कभार हो तो यह कोई रोग या गंभीर बात नहीं है, क्योंकि कभी-कभी अधिक उत्तेजना में या हड़बड़ाहट में, जल्दबाजी में, किसी के आ जाने के भय के कारण शीघ्र वीर्य निकल जाता है और पुरूष की उत्तेजना शांत हो जाती है। और यहीं से समस्या उत्पन्न हो जाती है, क्योंकि इस बीच फोर-प्ले करने से पुरूष की महिला साथी उत्तेजित हो जाती है, लेकिन तब तक पुरूष शिथिल हो चुका होता है।

शीघ्रपतन के कारण पति-पत्नी की सेक्स लाइफ प्रभावित होती है और रिश्तों में दरार आने लगती है। कई बार तो सुनने में आता है कि पति की सेक्स कमजोरी के कारण पत्नी अवैध रिश्तों के मकड़ जाल में फंस गई और पति को छोड़कर पराये पुरूष के साथ संबंध रखने लगी।

वैसे शीघ्रपतन कोई गंभीर समस्या नहीं है। अपनी मानसिक शक्ति को दृढ़, रखकर, धैय रखकर और अपनी दैनिक चर्या में सुधार लाकर इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। इसके साथ ही इलाज भी करा सकते हैं और पूरी तरह आराम पा सकते हैं। इस हिंदी लेख में हम आपको बता रहे हैं शीघ्रपतन से छुटकारा पाने के लिए आयुर्वेदिक उपचार के बारे में।

आप यह हिंदी लेख पर Shighrapatan.com पढ़ रहे है..

Shighrapatan.com
Shighrapatan.com

1.योग- गाजर के बीज 3 ग्राम, काली तुलसी के बीज 6 ग्राम, देसी अजवायन 250 ग्राम, ऊद गर्को 6 ग्राम, लौंग 3 ग्राम, जावित्री 6 ग्राम, फिटकरी डेढ़ ग्राम।
विधि- उपर्युक्त सभी औषधियाँ घोंट-पीसकर छान लें। इसके उपरान्त कुल औषधियों का तीन गुना शहद चूर्ण में मिलाकर माजूम बना लें। यह माजूम नपुंसकता नाशक है। शीघ्रपतन दूर करके रोगी को समर्थ बना देता है। इसके प्रयोग से वीर्य गाढ़ा होता है। गाढ़ा हो जाने के उपरान्त वीर्य की शक्ति बढ़ जाती है। इसका प्रभाव अमृततुल्य रामबाण सिद्ध है। 4-4 ग्राम माजूम दिन में 2 बार सुुबह-शाम सेवन करने का निर्देश दें। इस माजूम को वर्षों में कम से कम 2-3 माह अवश्य सेवन करना चाहिए। इसके सेवन से आमाशय-आँतें सबल होती हैं। कृमियों का नाश होता है। गुर्दे ताकतवर बन जाते हैं। खाया-पीया हज़म होने लगता है। बल और पुरूषार्थ बढ़ाने वाला यह माजूम जो पुरूष सेवन करता है, वह निश्चय ही स्त्री को तृप्त कर उसको प्रसन्न एवं संतुष्ट रखता है।

2 योग- सालब मिश्री 7 ग्राम, खोपरा 125 मि.ग्रा., तज 4 ग्राम, चिलगोज़ा 125 मि.ग्रा., संकाकुल मिश्री 7 ग्राम, बादाम 125 मि.ग्रा., दालचीनी 4 ग्राम, पिस्ता 125 मि.ग्राम., बहमन श्वेत 7 ग्राम, गाय के दूध का खोआ 500 कि.ग्रा. जायफल 5 ग्राम, लौंग 5 ग्राम।
विधि- उपर्युक्त समस्त औषधियाँ प्राप्त कर एकत्र करें। सभी के खरल में घोंट-पीसकर एक कर लें। उसके पश्चात् उसमें बारीक पिसी हुई मिश्री मिलाकर एक जान कर लें। भली-भाँति घुट-पिस जाने के उपरान्त 3 ग्राम की गोलियाँ बनाकर छाया में सुखाकर एक साफ-सुथरी पेंचदार ढक्कन युक्त काँच की शीशी में बंद करके रख लें। शीशी में रखने से पूर्व गोलियों पर चाँदी का वर्क चढ़ा देना चाहिए। मात्रा 3 ग्राम चूर्ण के रूप में भी इसको सेवन करने के लिए दिया जा सकता है। 1-1 गोली दिन में 2 बार अथवा आवश्यकतानुसार सेवन करने का निर्देश दें। यह अति तीव्र स्तम्भक चूर्ण या गोली है। एक बार सेवन करने के पश्चात् कई स्त्रियों को एक के बाद एक खुश किया जा सकता है। स्खलित होने की इच्छा होने पर रोगी को पहले ही निर्देश दें कि वह नींबू पानी पी लें। नींबू पानी पीने के पश्चात् वीर्य स्खलित हो जाता है।

यह भी पढ़ें- सफेद पानी गिरना

3. योग- कर्पूर, केसर, अकरकरा, सौंठ, लौंग और पिप्पली प्रत्येक 10-10 ग्राम।
विधि- उपर्युक्त सभी औषधियाँ एकत्र कर कूट-पीसकर सम सर्वत्र महीन कर लें। उसके बाद चने के बराबर गोलियों का निर्माण कर लें। ये गोलियाँ अति उपयोगी, असरकारक एवं श्रेष्ठ शक्तिदाता है। इसका स्तम्भक प्रभाव उच्चकोटि का होता है। ये तीव्र गति से शीघ्रपतन का नाश कर रोगी को पूर्ण सक्षम(समर्थ) बना देने की अद्भुत क्षमता रखने वाली गोलियाँ हैं। आवश्यकतानुसार इन गोलियों को प्रयोग करने का निर्देश दें। सुबह-शाम 1-1 गोली देना पर्याप्त है। साथ में दूध पीने की सलाह भी दें। यह पुरानी नपुंसकता-नामर्दी को भी दूर कर देती है। वीर्यदोष भी इसके प्रभाव से दूर हो जाते हैं।

4. योग- कुश्ता कलई, चारों गोंद अलग-अलग प्रत्येक शतावर, गोखरू, काली मूसली, श्वेत मूसली और सिंघाड़े का आटा प्रत्येक 12.5 ग्राम, चीनी आवश्यकतानुसार।
विधि- उपर्युक्त सभी औषधियाँ कूट-पीसकर बारीक करें। इसको छानकर पुनः इतना कूटें कि मैदे जैसा महीन पाउडर बन जाये। अंत में जब महीन पाउडर बन जाये, तब एक बेर के बराबर गोलियाँ बनाकर रख लें। 1-1 गोली दिन में 2 बार दूध के साथ दें। संभोग में ये गोलियाँ अद्वितीय प्रभाव उत्पन्न कर नपुंसकता-नामर्दी, शीघ्रपतन, वीर्यदोष, वीर्य का पतलापन दूर कर रोगी को पूर्ण सक्षम सामथ्र्य प्रदान करती हैं।

सेक्स समस्या से संबंधित अन्य जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें..http://chetanclinic.com/

Summary
Shighrapatan Ka Ilaj
Article Name
Shighrapatan Ka Ilaj
Description
केवल पुरूषों के लिए हिंदी में ब्लाॅग, जानिए शीघ्रपतन क्यों होता है? Shighrapatan Ki Ilaj
Author
Publisher Name
Chetan Anmol Sukh
Publisher Logo

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »